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linux-logoFOSS(Free and Open Source Software) मुक्त एवं मुफ्त सॉफ्टवेयर के विश्व में तेजी से बढ़ते प्रभाव से भारत में भी इसका प्रचलन बढ़ता जा रहा है। आने वाले कुछ वर्षों में यह और भी ज्यादा प्रभावशाली होगा। चूंकि अभी तक FOSS के अंतर्गत आने वाले लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम को कठिन माना जाता रहा था और इसकी सही जानकारी नही होने के कारण भी आम कम्प्यूटर उपयोगकर्ता इसका उपयोग नही कर पा रहे थे। लेकिन अब स्थितियां तेजी से बदल रही हैं। FOSS एक अंतर्राष्ट्रीय समुदाय है जिसमें विश्व के समस्त कम्प्यूटर के प्रोग्रामर, डेवेलपर्स अन्य क्षेत्रों के लोग शामिल हैं जो सॉफ्टवेयर या तकनीक की आजादी के लिए काम कर रहे हैं। इसलिए इन सभी लोगों का मानना है कि तकनीक सभी के लिए स्वतंत्र तथा बिना शुल्क के उपलब्ध हो। इसी क्रम में FOSS के अंतर्गत लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम की शुरुआत की गई। चूंकि विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम जिसे माइक्रोसॉफ्ट नें बनाया है और इसे शुल्क लेकर उपभोक्ता को उपयोग करने की अनुमति देता है लेकिन अधिकतर उपयोगकर्ता पायरेटेड ही इसका प्रयोग करते हैं एवं इसके साथ हजारों रुपयों की कीमत के अन्य सॉफ्टवेयरों का भी प्रयोग करते हैं। जो बिना शुल्क दिए कर रहे हैं। जिसे पायरेसी कहा जाता है। यानि कि सभी लोग अनजाने में अपराध कर रहे हैं। अगर कोई कम्प्यूटर उपयोगकर्ता शुल्क देकर माइक्रोसॉफ्ट का ऑपरेटिंग सिस्टम खरीदता है तो उसे उसके बदले में सिर्फ उपयोग करने की अनुमति मिलती है। अगर उपयोगकर्ता उसमें कोई परिवर्तन करना चाहे तो तो भी नही कर सकता। इसके अलावा उपयोगकर्ता को अन्य सॉफ्टवेयरों की जरूरत पड़ती है। उसे अन्य सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता है जो कि महंगे होते हैं। जिन्हे एक आम व्यक्ति खरीद नही पाता है और इस कारण बाजार में वह बाजार में उपलब्ध पायरेटेड सॉफ्टवेयर उपयोग में लाता है। इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट के ऑपरेटिंग सिस्टम में वायरस की एक बड़ी समस्या है। जिसके लिए उपयोगकर्ताओं को हजारों रुपयों के एंटी वायरस खरीदने पड़ते हैं। इस तरह कई समस्याओं के चलते FOSS के अंतर्गत लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम का निर्माण हुआ जो कि बेहद सुदृढ़ सॉफ्टवेयर है।
इसमें वायरस का असर नही के बराबर है।
चूंकि यह स्रोत कोड भी प्रदान करता है इसलिए यदि उपयोगकर्ता को अच्छी प्रोग्रामिंग की जानकारी है तो वह इसमें किसी भी तरह का फेरबदल कर अपनी आवश्यकता के अनुसार लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम का निर्माण कर सकता है और दूसरे व्यक्ति हो भी दे सकता है। इसे हम “डिस्ट्रीब्यूशन” कह सकते हैं।
इसके अतिरिक्त लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम में पच्चीस हजार से अधिक पैकेज हैं जिन्हे उपयोगकर्ता इंटरनेट से मुफ्त में डाउनलोड करके प्रयोग कर सकता है।
इस ऑपरेटिंग सिस्टम को “लाइव सीडी/डीवीडी, पेन ड्राइव” की सहायता से बिना हार्ड डिस्क में स्थापित किए भी अपना काम कर सकते हैं और हार्ड डिस्क में स्थापित भी कर सकते हैं। यदि किसी कम्प्यूटर में पहले से ही कोई ऑपरेटिंग सिस्टम स्थापित है जैसे विंडोज तब भी इसे उसके साथ समानांतर ढंग से स्थापित किया जा सकता है। इसे ड्यूल बूट सिस्टम कहा जाता है।

लेखन:
जी. टी. राव
http://fossyatra.wordpress.com
Email:[email protected]

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