उबुन्टू में सॉफ्टवेयर/पैकेज प्रबंधन

आज हम लिनक्स में सॉफ्टवेयर स्थापना के विषय में चर्चा करेंगे । सबसे पहले ये जानना जरूरी है की सॉफ्टवेयर प्रबंधन के मामले में लिनक्स विन्डोज़ से किस प्रकार भिन्न है । विन्डोज़ में कोई भी सॉफ्टवेयर का सेटअप अपने भीतर मुख्य साफ्टवेयरों के साथ साथ सहायक साफ्टवेयरों अथवा अन्य सिस्टम फाइलों को भी समाये रहता है । किन्तु लिनक्स में प्रत्येक सॉफ्टवेयर एक पैकेज के रूप में होता है और उसे चलने के लिए जिन सहायक पैकेजों की आवश्यकता होती है उन्हें अलग से स्थापित करना होता है । लिनक्स में नॉटिलस फाइल प्रबंधक से लेकर फौन्ट तक सब पैकेजों के रूप में होते हैं।

एपीटी तथा डीपीकेजी

उबुन्टू में साफ्टवेयरों का प्रबंधन एपीटी तथा डीपीकेजी नामक दो औजारों के जरिए किया जाता है। डीपीकेजी केवल पैकेजों को जोड़ने अथवा हटाने का कार्य करता है वहीं एपीटी यह कार्य करने के अलावा कौन से पैकेज स्थापित हैं और कौन से सहायक पैकेज हैं जैसी बातों का भी हिसाब रखता है। एपीटी सहायक पैकेजों को स्थापित करने, सॉफ्टवेयरों को अद्यतित करने, पैकेजों में विरोधाभास खोजकर बताने जैसे कार्य भी करता है। इन सभी कार्यों को करने के लिए एपीटी सॉफ्टवेयर कोषों से जानकारी प्राप्त करता है।

सॉफ्टवेयर रिपोजिटरी / कोष

सॉफ्टवेयर रिपोजिटरी / कोष वह स्थान है जहाँ विभिन्न पैकेजों का भंडार उपलब्ध होता है । यह जगह अंतर्जाल में स्थित कोई स्थान अथवा आपकी सीडी रोम कहीं भी हो सकता है। आपकी उबुन्टू की सीडी भी एक सॉफ्टवेयर कोष है। विंडोज़ में किसी सॉफ्टवेयर को स्थापित करना हो तो उसे अंतर्जाल से डाउनलोड करना पड़ता है अथवा सीडी खरीदनी पड़ती है। लिनक्स में लगभग कोई भी सॉफ्टवेयर, सॉफ्टवेयर कोषों से ही स्थापित किए जाते हैं। और यह कार्य एपीटी करता है।

अब चूंकि लिनक्स के ज्यादातर सॉफ्टवेयर मुक्त स्रोत होते हैं अत: उबुन्टू के डेवेलपर उनका स्रोत कोड लेकर उन्हे इस प्रकार पुन: बनाते हैं कि वो उबुन्टू के साथ अच्छी तरह चल सकें। इन सॉफ्टवेयरों को उबुन्टू के आनलाइन सॉफ्टवेयर कोषों पर डाल दिया जाता है, जहां से उबुन्टू उपयोगकर्ता एपीटी जैसे किसी औजार के जरिए अपने कम्प्यूटर में स्थापित कर सकते हैं।

उबुन्टू के साथ यह शायद ही हो कि आप किसी साइट में जाकर कोई सॉफ्टवेयर डाउनलोड करें और उसे स्थापित करें। कभी कभी ऐसा भी होता है कि आप साइट में जाकर कोई सॉफ्टवेयर डाउनलोड करके स्थापित करते हैं और वह सॉफ्टवेयर, सॉफ्टवेयर कोष में हो तो आपको एक सलाह का संदेश दिखाई देता है कि उक्त सॉफ्टवेयर, सॉफ्टवेयर कोष में भी उपलब्ध है और आपको उसका कोष वाला संस्करण ही स्थापित करना चाहिए।

उबुन्टू में पहले से ही कुछ सॉफ्टवेयर कोष जुड़े होते हैं जहां से सॉफ्टवेयर स्थापित किए जा सकते हैं।

कभी कभी आपको अपने पसंद का सॉफ्टवेयर उबुन्टू के कोषों में नही मिलता है। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि वो सॉफ्टवेयर बहुत नया है और उबुन्टू के डेवेलपरों नें उसे अभी कोष में नही डाला है। ऐसे में आपको सॉफ्टवेयर डाउनलोड करके स्थापित कर लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में आप सॉफ्टवेयरों को डेवलपर के पीपीए(पर्सनल पैकेज आर्काइव) के जरिए उसके स्वयं के कोष से भी प्राप्त कर सकते हैं (यदि वह उपलब्ध है)।

उबुन्टू के प्रमुख सॉफ्टवेयर कोष

कोष का नाम विवरण
Main (मेन) उबुन्टू को चलाने हेतु यह कोष बहुत आवश्यक है। इस कोष में उबुन्टू के क्रोड पैकेज उपलब्ध रहते हैं। ये वो पैकेज होते हैं जिनसे उबुन्टू को स्थापित किया जा सकता है। हालांकि कुछ ऐसे भी पैकेज होते हैं जिनकी शुरुआती सेटअप में जरूरत नही होती है। यह कैनॉनिकल द्वारा आधिकारिक रूप से समर्थित है।
Universe (यूनिवर्स) यूनिवर्स कोष के सॉफ्टवेयर मुख्य रूप से उबुन्टू तथा डेबियन समुदाय के लोगों द्वारा बनाए तथा संभाले जाते हैं। इसमें ढेरों मुफ्त के सॉफ्टवेयर होते हैं। इनके अद्यतन निश्चित नही होते हैं क्योंकि ये कैनॉनिकल द्वारा समर्थित नही होते हैं।
Restricted (रेस्ट्रिक्टेड) कुछ ऐसे सॉफ्टवेयर (जैसे कि प्रापराइटरी हार्डवेयर ड्राइवर) होते हैं जो कि मुक्त स्रोत नही हैं, परंतु कम्प्य़ूटर चलाने के लिए जरूरी हैं। ऐसे सॉफ्टवेयरों को इस कोष में रखा जाता है। इस कोष के सॉफ्टवेयरों को अद्यतित किया जाता है।
Multiverse(मल्टीवर्स) कुछ सॉफ्टवेयर प्रतिलिप्याधिकार अथवा कानून के द्वारा सुरक्षित होते हैं ऐसे सॉफ्टवेयर इस कोष में रखे जाते हैं। यहां पाए जाने वाले सॉफ्टवेयर उबुन्टू के मुफ्त सॉफ्टवेयर लाइसेंस अनुबंध से मेल नही खाते हैं। इन्हे कैनॉनिकल द्वारा समर्थन प्राप्त नही होता है और यह भी हो सकता है कि ये अद्यतित ना हों।
Updates (अपडेट्स) इसके अंतर्गत दो कोष होते हैं।

Security (सिक्यूरिटी) कोष जरूरी सुरक्षा अद्यतन प्रदान करता है तथा Upadates(अपडेट्स) कोष अनुसंशित अद्यतनों को प्रदान करता है।

एपीटी तथा डीपीकेजी

उबुन्टू में साफ्टवेयरों का प्रबंधन एपीटी तथा डीपीकेजी नामक दो औजारों के जरिए किया जाता है। डीपीकेजी केवल पैकेजों को जोड़ने अथवा हटाने का कार्य करता है वहीं एपीटी यह कार्य करने के अलावा कौन से पैकेज स्थापित हैं और कौन से सहायक पैकेज हैं जैसी बातों का भी हिसाब रखता है। एपीटी सहायक पैकेजों को स्थापित करने, सॉफ्टवेयरों को अद्यतित करने, पैकेजों में विरोधाभास खोजकर बताने जैसे कार्य भी करता है। इन सभी कार्यों को करने के लिए एपीटी सॉफ्टवेयर कोषों से जानकारी प्राप्त करता है।

एपीटी के जरिए पैकेज प्रबंधन

कार्य आदेश
सॉफ्टवेयर कोषों की सूची को अद्यतित करना: apt-get update
किसी पैकेज को खोजना apt-cache search <packagename>

उदाहरण: apt-cache search kubuntu

किसी पैकेज के संबंध में पूरी जानकारी देखना apt-cache show <packagename>

उदाहरण: apt-cache show kubuntu

किसी पैकेज को स्थापित करना apt-get install <packagename>

उदाहरण: apt-get install kubuntu-desktop

[इस आदेश के पहले sudo लगाना जरूरी है]

किसी पैकेज को हटाना apt-get autoremove <packagename>

उदाहरण: apt-get autoremove kubuntu-desktop

[इस आदेश के पहले sudo लगाना जरूरी है]

आपको इसमें हटाए जाने वाले पैकेजों की सूची दिखाई जाएगी जिनमें सहायक पैकेज भी होंगे, आपको Y/N दबाकर आखिरी आदेश देना होगा।

किसी पैकेज को पुन: स्थापित करना apt-get –reinstall install <packagename>

उदाहरण: apt-get –reinstall install kubuntu-desktop

[इस आदेश के पहले sudo लगाना जरूरी है]

सिनैप्टिक पॅकेज प्रबंधक

सिनैप्टिक को आप एपीटी का जी यू आई मान सकते हैं। आइए इसमें कार्य करने के विभिन्न तरीकों को जानें।

कार्य तरीका
सिनैप्टिक पैकेज प्रबंधक चालू करना System > Administration > Synaptic Package Manager
पैकेजों की सूची को अद्यतित करना ऊपर के टूलबार में एक “रिलोड” नाम का बटन होता है। उसमें क्लिक करें
पैकेजों को खोजना १. मुख्य टूलबार में क्विक सर्च नाम की जगह बनी होती है। इसमें शब्द लिखकर आप पैकेजों को खोज सकते हैं।

२. क्विक सर्च के बगल में एक सर्च नाम की बटन बनी होती है जिसमें क्लिक करके आप अधिक उन्नत तरीके से पैकेजों को खोज सकते हैं।

किसी पैकेज को स्थापित करना किसी पैकेज पर क्लिक करके फिर “mark for installation” पर क्लिक करके उसे स्थापना हेतु चिन्हित कीजिए। फिर एप्लाई बटन पर क्लिक कीजिए।
किसी पैकेज को हटाना किसी पैकेज पर क्लिक कीजिए फिर मेन्यू में “mark for removal” पर क्लिक करके उसे हटाने हेतु चिन्हित कीजिए। अब एप्लाई बटन पर क्लिक कीजि॥
किसी पैकेज को पुन: स्थापित करना किसी पैकेज पर क्लिक कीजिए फिर मेन्यू में “mark for reinstalltion” पर क्लिक कीजिए। अब एप्लाई बटन पर क्लिक कीजिए।

डीपीकेजी के जरिए पैकेज प्रबंधन

डिपीकेजी द्वारा किसी पैकेज को स्थापित करने तथा हटाने के लिए क्रमश: -i तथा -r विकल्पों का प्रयोग किया जाता है। जैसे:

sudo dpkg -i packagename.deb [स्थापना हेतु]
sudo dpkg -r packagename [हटाने हेतु]

कृपया ध्यान रखें कि एक बार डिपीकेजी के द्वारा पैकेज स्थापित हो जाने के पश्चात apt-get autoremove आदेश के द्वारा भी उसे हटाया जा सकता है।

पैकेज को स्थापित करते समय उसकी फाइल के पूरे नाम को लिखना होता है। किन्तु हटाते समय उसके संक्षिप्त नाम भर से काम चल जाता है। यह संक्षिप्त नाम सामान्यत: उस पैकेज फाइल के नाम का शुरुआती हिस्सा होता है।

पैकेज से संबंधित जानकारी देखना: किसी डेब फाइल की जानकारी देखने के लिए -I विकल्प का प्रयोग किया जाता है। जैसे:

dpkg -I packagename.deb

उबुन्टू में सॉफ्टवेयर कोष जोड़ना

उबुन्टू में आप केवल आधिकारिक कोषों का प्रयोग करने के लिए बाध्य नही हैं। आप चाहें तो अन्य कोषों को भी जोड़कर उनके सॉफ्टवेयर एपीटी के जरिए स्थापित कर सकते हैं। आइए देखते हैं कि किसी सॉफ्टवेयर कोष को कैसे जोड़ा जाए।

उदाहरण के लिए स्काइप के कोष को जोड़ने के लिए कुछ इस प्रकार आदेश देना होगा:

deb http://download.skype.com/linux/repos/debian/ stable non‐free

इस आदेश के पश्चात आपको पैकेजों की सूची पुन:लोड करनी होगी जिसके लिए

sudo apt-get update

आदेश का प्रयोग करना होगा।

दूसरा तरीका ये है कि आप System > Administration > Software Sources में जाएं। सॉफ्टवेयर सोर्सेज़ के डायलाग बाक्स में Other Software टैब में जाएं और Add बटन में क्लिक करें। अब ऊपर लिखी लाइन को Apt Line के आगे लिखकर Add Source बटन पर क्लिक कर दें।

जब आप क्लोज़ बटन पर क्लिक करके यह डायलाग बाक्स बंद कर रहे होंगे तो आपसे पैकेजों की सूची को पुन:लोड करने के लिए पूछा जाएगा। तब रिलोड बटन पर क्लिक कर दें।

जब भी आप ऊपर में से किसी भी तरीके का उपयोग करते हैं तब असल में होता ये है कि आपके द्वारा दिया गया कोष का पता /etc/apt/sources.list नामक फाइल में जुड़ जाता है। आप यह कार्य चाहें तो सीधे इस फाइल को खोलकर उसमें वह पता लिखकर भी कर सकते हैं।

कोष कुंजी / रिपॉजिटरी की को जोड़ना

कभी कभी कुछ कोष एक डिजिटल कुंजी के द्वारा हस्ताक्षरित रहते हैं। प्रोग्रामर ऐसा उनके पैकेजों की सुरक्षा के लिए करते हैं। प्रोग्रामर प्रत्येक पैकेज को एक गुप्त आईडी के द्वारा चिन्हित कर देता है जिसे केवल वह ही जानता है, जिसका सार्वजनिक हिस्सा उपयोगकर्ताओं को कम्प्यूटर पर स्थापित करने के लिए दे दिया जाता है।

यह कुंजी फाइल सॉफ्टवेयर प्रदाता की ही साइट पर उपलब्ध होती है। इसका एक्सटेंशन .asc अथवा .gpg हो सकता है। इसे आप अपने कम्प्यूटर पर डाउनलोड कर सकते हैं। ध्यान रखें कि कुंजी फाइल आप सही साइट से ही डाउनलोड करें।

कुंजी फाइल को जोड़ने के लिए निम्न लिखित आदेश दें:

sudo apt-key add keyfile.gpg

दूसरा तरीका : Software Source के डायलाग बाक्स में Authentication टैब में जाएं और फिर IMPORT KEY FILE बटन में क्लिक करके उस कुंजी फाइल को खोजकर आयात कर लें।

स्रोत कोड कंपाइल करके सॉफ्टवेयर स्थापित करना

लिनक्स के कुछ सॉफ्टवेयर बाइनरी रूप में ना आकर स्रोत कोड के रूप में आते हैं। ऐसी स्थिति में उन्हे कंपाइल करके स्थापित करना होता है। यदि आप किसी सॉफ्टवेयर को कंपाइल करके स्थापित करना चाहते हैं तो पहले सिनैप्टिक पैकेज मैनेजर अथवा एपीटी के जरिए build-essential नामक पैकेज स्थापित कर लीजिए। इसके साथ वो कई सॉफ्टवेयर भी स्थापित हो जाते हैं जिनका प्रयोग किसी पैकेज को कंपाइल करने में होता है।

पैकेज के स्रोत कोड को आर्काइव से निकालें फिर टर्मिनल के जरिए उसकी डायरेक्ट्री में जाकर निम्न लिखित आदेश दें:

./configure
make
sudo make install

१. ./configure यह आदेश एक स्क्रिप्ट को क्रियान्वित कर देता है जिसके जरिए यह जांच की जाती है कि इस सॉफ्टवेयर को स्थापित करने के लिए जरूरी सहायक पैकेज कम्प्यूटर में स्थापित हैं या नही।

२. make यह आदेश असल में कम्पाइल प्रक्रिया को शुरू करता है

३. sudo make install सॉफ्टवेयर के कम्पाइल हो जाने के पश्चात यह आदेश फाइलों को कम्प्यूटर की सही जगहों पर रखकर सॉफ्टवेयर को स्थापित कर देता है।

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