आपकी रचनाएं सादर आमंत्रित हैं

हिन्दी भाषा में सूचना एवं तकनीक की दुनिया की जानकारी को आम जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से अंतर्जाल डॉट इन की स्थापना की गई है। इस जालस्थल में आप सभी की रचनाएं आमंत्रित है। आप अपनी रचनाएं निम्नलिखित स्तंभों के अंतर्गत भेज सकते हैं:

अंतर्जाल एवं वेब अनुप्रयोग
अब क्लाउड पर चलने वाले सॉफ्टवेयरों, आनलाइन सेवाओं जैसे ड्रॉप बॉक्स, ईमेल, चैट, एविरी सुईट आदि से जुड़े लेख।

ऑफिस सुईट:
गूगल डॉक्स से लेकर ओपन ऑफिस, एमएस ऑफिस आदि ऑफिस सुइटों के नुस्खे।

कम्प्यूटर सुरक्षा:
वायरस, हैकिंग आदि से कम्प्यूटर को बचाने के तरीके। एंटी वायरस, फायरवाल आदि पर लेख।

डेवेलपर कोना:
“डेवेलपर-डेवेलपर-डेवेलपर” जी हां! इनके बगैर तो कम्प्यूटर की दुनिया चलेगी ही नही। जावा, सी, सी शार्प, पीएचपी आदि की दुनिया से जुड़े लेख, सॉफ्टवेयरों आदि की जानकारी, जो डेवेलपरों के काम की हो।

वेब ब्राउजर:
फायरफॉक्स, इंटरनेट एक्सप्लोरर, ओपेरा, क्रोम आदि के एक्सटेंशनों, नुस्खों आदि पर लेख।

श्रृंगार:
कम्प्यूटर के रंगरूप को मनमुताबिक ढालने, थीम्स, वालपेपर आदि पर लेख।

समाचार:
देश दुनिया में आजकल विज्ञान एवं टेक्नॉलॉजी की दुनिया में क्या चल रहा है। नए समाचार इस स्तंभ में।

सॉफ्टवेयर एवं नुस्खे:
कम्प्यूटर पर जटिल कार्य को सरल बनाने के नुस्खे से लेकर, किसी सॉफ्टवेयर आदि पर लेख इस स्तंभ में।

ज्ञान विज्ञान:
कम्प्यूटर की दुनिया से अलग प्राणि जगत, अंतरिक्ष, भूगोल, विज्ञान आदि से जुड़े लेख।

यदि आप किसी अन्य स्तंभ के अंतर्गत (जिसका जिक्र ऊपर नही है) लेखों की श्रृंखला प्रकाशित करवाना चाहते हैं तो वे भी आमंत्रित है। अपनी रचनाएं हमें निम्नलिखित पते पर भेजें:

admin (at ) antarjaal (dot) in

अपनी रचनाएं भेजते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:

  • रचनाओं में हिन्दी का अधिकतम प्रयोग हो। हिन्ग्लिश से बचें। लेकिन “लौह पथ गामिनी” सरीखे हिन्दी भी न हो।
  • रचनाओं में आवश्यकता पड़ने पर संपादक उसमें आवश्यकतानुसार संपादन कर सकता है।
  • रचनाओं के साथ यदि चित्र भी हैं (जैसे स्क्रीनशॉट) तो उन्हे भी साथ ही भेजा जा सकता है। ऐसी स्थिति में आप अपना लेख तथा चित्र एक जिप फाइल में भेज सकते हैं।
  • रचनाओं को हिन्दी यूनिकोड फौन्ट में भेजें। कृतिदेव आदि फौन्ट स्वीकार्य नही हैं।
  • आप अपनी रचनाएं इन फाइल संरूपों में भेज सकते हैं: doc, docx, rtf, html, odt
  • वर्तमान में रचनाओं पर किसी प्रकार के परिश्रामिक की व्यवस्था नही है। हां, आपका संक्षिप्त परिचय आपकी रचना के नीचे होगा जिससे आपका प्रचार होगा।